टीस का टशन

टशन, एक विज्ञापन से इस शब्द का फैलाव हमारे समाज कुछ इस तरह से हुआ कि युवा पीढ़ी इसकी जद में आ गई। इग्जैक्ट मीनिंग तो मैं नहीं बता सकता लेकिन इसे कुछ लोग( युवा ) भोकाल कहते हैं तो कुछ लोग ऐटिट्यूड। जी हां टशन का होना अच्छी बात है और जब किसी बात में टशन हो तो फिर क्या बात है। ब्लॉग में बेलाग टिप्पणी कर अपनी टीस या सभ्य शब्दों में कहें तो भावों को निकालने में इस टशन का यूज ही 'टीस का टशन' को जन्म देती है। ये क्यों कहें कि दिन आजकल अपने खराब हैं कांटों में घिरे हैं समझलो गुलाब हैं...

बुधवार, जून 29, 2011

जल्द आ रहा हूं नई पोस्ट के साथ ........इंतजार करिए ।

प्रस्तुतकर्ता sarvesh upadhyay कोई टिप्पणी नहीं:
नई पोस्ट पुराने पोस्ट मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें टिप्पणियाँ (Atom)

Facebook Badge

Sarvesh Upadhyay

Create Your Badge

फ़ॉलोअर

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
sarvesh upadhyay
संगम की धरती से संबंध रखता हूं, प्रयाग का रहने वाला हूं। निराला के शहर से जुड़ा होने के कारण थोड़ा स्वाभाव से अक्खड़ हूं। ग्रेजुएशन पूरब के ऑक्सफोर्ड से की है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रखी है। पढ़ने में कैसा रहा इस बात का तो पता नहीं, लेकिन जिस भी संस्थान से पढ़ा वहां के गुरूजन और मैनेजमेंट के लोग याद करते हैं अभी तक। पत्रकारिता करियर की बात करें तो मुंबई के स्टार न्यूज से शुरूआत की फिर इलाहाबाद दैनिक जागरण ( आई-नेक्स्ट )में काम किया। दिल्ली में भी प्रिंट मीडया में काम किया है लेकिन उनका जिक्र नहीं करना चाहता। किस्मत और मेहनत ने साथ दिया तो सोनी चैनल के क्राइम पेट्रोल के लिए लगभग तीन साल तक रिसर्च हेड के तौर पर अपनी सेवा दी और कार्यमुक्त हो गया । बिग नैजिक चैनल में क्रिएटिव के पद पर आसीन रहा फिर काफी सारे क्राइम सीरियल्स के लिए लिखा भी और कहानियों भी दीं । अभी फिलवक्त एक फिल्म के लिए लिख रहा हूं और मस्ती से जीवन का अानंद उठा रहा हूं । हर फिक्र को धुएं में उड़ाता चला जा रहा हूं वो भी टशन में ।
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें

ब्लॉग आर्काइव

  • ►  2014 (2)
    • ►  नवंबर (2)
  • ▼  2011 (1)
    • ▼  जून (1)
      • जल्द आ रहा हूं नई पोस्ट के साथ ........इंतजार करिए ।
  • ►  2010 (5)
    • ►  जून (2)
    • ►  अप्रैल (3)

मेरी पसंद ....

  • www.youtube.com
चित्र विंडो थीम. suprun के थीम चित्र. Blogger द्वारा संचालित.